2 अक्टूबर 2019 - 13:38
अधिकतम दबाव नाकाम हो चुका है, परमाणु समझौते की कटिबद्धताओं का स्तर कम करते रहेंगेः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अमरीका की अधिकतम दबाव की नीति के विफल होने और वर्चस्ववादी व्यवस्था के सामने ईरान के न झुकने की तरफ़ इशारा करते हुए कहा है कि ईरान पूरी दृढ़ता के साथ दृष्टिगत नतीजे तक पहुंचने तक परमाणु कटिबद्धताओं को कम करने का क्रम जारी रखेगा।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार को इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी के हज़ारों कमांडरों से मुलाक़ात में ईरान की विफलता का ढिंढोरा पीटने की अमरीकियों की विफल कोशिशों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा है कि वे ईरान के राष्ट्रपति को ट्रम्प से मिलने पर बाध्य करने के लिए गिड़गिड़ाए भी और उन्होंने अपने यूरोपीय दोस्तों से मदद भी ली लेकिन वे ऐसा न कर सके और उनकी अधिकतम दबाव की नीति अब तक नाकाम रही है और मैं पूरे विश्वास से कहता हूं कि आगे भी यह नीति पूरी तरह से विफल रहेगी। उन्होंने इसी तरह परमाणु मामले की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि परमाणु कटिबद्धताओं में कमी, जिसकी ज़िम्मेदारी देश की परमाणु ऊर्जा संस्था पर है, सरकार की घोषणा के अनुसार पूरी गंभीरता से और सटीक व समग्र ढंग से जारी रहनी चाहिए यहां तक कि दृष्टिगत नतीजे तक पहुंच जाए और निश्चित रूप से नतीजा हासिल होगा।

 

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ व सीरिया में दुश्मनों विशेष कर अमरीका द्वारा ख़र्च किए गए धन की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने अत्यधिक धन लुटा कर दाइश को अस्तित्व प्रदान किया और फिर उसकी सामरिक, आर्थिक और प्रचारिक मदद की और अब जब सीरिया, इराक़ व ईरान के जवानों की कोशिशों से दाइश का अंत हो गया है तो वे झूठ बोल रहे हैं कि हमने दाइश को समाप्त किया है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कुफ़्र व अत्याचार के साझा मोर्चे के मुक़ाबले में प्रतिरोध के महान मोर्चे की क्षमताओं की सराहना करते हुए आईआरजीसी को सिफ़ारिश की कि वह प्रतिरोध के भूगोल पर व्यापक व सीमापार दृष्टि को हाथ से न जाने दे।

 

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने आर्थिक मामलों के बारे में कहा कि कुछ लोग पहले भविष्यवाणी कर रहे थे कि जारी वर्ष ईरान के लिए आर्थिक समस्याओं से भरा साल होगा जबकि अब देश के अधिकारी जारी वर्ष की पहली छमाही में अपेक्षाकृत बेहतर आर्थिक विकास की सूचना दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अत्याचार, साम्राज्य और कुफ़्र की दुनिया से ईरानी राष्ट्र के वर्तमान संघर्ष को जिस कोण से भी देखा जाए, अंतिम विजय ईरानी राष्ट्र की ही है।